Praggnanandhaa Rameshbabu: World’s second youngest Chess Grandmaster – प्रज्ञानानंद रमेशबाबू

प्रज्ञानानंद रमेशबाबूः विश्व का दूसरा सबसे छोटा शतरंज ग्रैंडमास्टर

प्रज्ञानान्द रमेशबाबू एक ऐसा नाम है, जो शतरंज की दुनिया में हलचल मचा रहा है. भारतीय शतरंज प्रेमी 13 साल के इस बालक को अपने महानतम ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद की विरासत को आगे बढ़ाने वाले खिलाड़ी के रूप में देख रहे हैं.  प्रज्ञानान्द रमेशबाबू शतरंज के खेल में दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र में  ग्रैंडमास्टर बनने वाले शख्स हैं. जबकि, वर्तमान में वे ही सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर हैं.  आइए जानते हैं, शतरंज की नई प्रतिभा प्रज्ञानानंद रमेशबाबू के बारे में-

Biography of Praggnanandhaa Rameshbabu प्रज्ञानान्द रमेशबाबू का जीवन परिचय

प्रज्ञानान्द रमेशबाबू ने 23 जून 2018 को 12 वर्ष 10 माह और 13 दिन की आयु में शतरंज का ग्रैंडमास्टर बन इतिहास रचा.  अब तक यूक्रेन में जन्मे और अब रूस में रह रहे सर्गेई अलेक्जेंड्रोविच कार्जाकिन ही उनसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बने हैं. सर्गेई कार्जाकिन 2003 में 12 वर्ष 7 माह की आयु में ग्रैंड मास्टर बने थे. आपको बता दें कि अभी विश्व के सर्वश्रेष्ठ शतरंज खिलाड़ी नॉर्वे के मैगनस कार्लसन हैं, जो 13 वर्ष 4 माह की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे.

Praggnanandhaa Rameshbabu’s Family Life प्रज्ञानान्द रमेशबाबू का परिवार

प्रग्नानानंद रमेशबाबू का जन्म 10 अगस्त 2005 को  चेन्नई में हुआ. प्रज्ञानान्द अपने माता, पिता और बहन के साथ चेन्नई के उपनगरीय क्षेत्र पाडी में रहते हैं. उनके पिता के. रमेशबाबू एक बैंक अधिकारी हैं  और उनकी मां नागलक्ष्मी एक गृहिणी हैं. दोनों ही शतरंज नहीं खेलते हैं. प्रज्ञानान्द की बड़ी बहन वैशाली रमेशबाबू भी शतरंज की खिलाड़ी हैं. वैशाली बालिकाओं में अंडर-12 और अंडर-14 में वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप जीत चुकी हैं. वैशाली 12 अगस्त, 2018 को लातविया के रिगा में अपना अंतिम नॉर्म पूरा कर वुमन ग्रैंडमास्टर बन गई हैं.  रमेशबाबू परिवार कल्कि भगवान का अनुयायी है.

Sports career of R. Praggnanandhaaआर. प्रज्ञानानन्द का खेल करियर

आर. प्रज्ञानान्द भले ही उम्र में छोटे क्यों न हों, लेकिन अंतरराष्ट्रीय शतरंज जगत में उनका नाम गम्भीरता से लिया जाने लगा है. जून 2018 लियोन मास्टर्स टूर्नामेंट में उन्हें विश्व शतरंज में सातवें नम्बर के खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर वेस्ले सो के साथ 4 मैच का रैपिड गेम खेलना था.

माना जा रहा था कि वेस्ले सो के लिए ये आसान मैच साबित होगा. लेकिन प्रज्ञानान्द ने अपने से बड़े और अनुभवी खिलाड़ी को पहले गेम में  हराकर सभी को चौंका दिया. तीन गेम खत्म होने तक स्कोर 1.5-1.5 पर टाइ था. आखिरी गेम में वेस्ले सो अपने अनुभव का लाभ उठाकर युवा प्रतिद्वन्दी प्रज्ञानान्द को हराकर मैच जीतने में सफल हो पाए.

हारने के बाद भी मुस्कराते हैं प्रज्ञानानन्द

प्रज्ञानानन्द लम्बी रेस के खिलाड़ी हैं क्योंकि उन्होंने कम उम्र में ही हार बर्दाश्त करना और हारने का विश्लेषण कर अपनी गलतियां दूर करना सीख लिया है. नीदरलैंड्स में शाकवीक एपेलडूर्न टूर्नामेंट में प्रज्ञानानन्द ग्रैंडमास्टर टाइटल हासिल कर इतिहास रचने के इरादे के साथ हिस्सा ले रहे थे, लेकिन वे 9 में से 6 गेम हार गए. टूर्नामेंट में चौथी वरीयता के खिलाड़ी होने के बावजूद वे अंत में नीचे से दूसरे स्थान पर रहे.

यह उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था. इसके बावजूद वे हार से विचलित नहीं हुए बल्कि हार को भी मुस्कराहट के साथ स्वीकार कर अगली बार और मजबूती के साथ खेलने का संकल्प लिया. अगले ही दिन से वे इटली के छोटे से शहर ओर्तिसेइ में ग्रेडिने ओपन में खेलने उतरे.  प्रज्ञानानन्द ने इस बार शानदार खेल दिखाया और दूसरा स्थान हासिल करते हुए ग्रैंडमास्टर बनकर इतिहास रच दिया.

R. Praggnanandhaa aims to become World Chess Champion विश्व चैम्पियन बनना चाहते हैं प्रज्ञानानंद

वैशाली और प्रज्ञानानंद के पिता के. रमेशबाबू ने अपने दोनों बच्चों को टेलीविजन पर कार्टून चैनल देखने की आदत से छुटकारा दिलाने के लिए पास की शतरंज एकेडमी में दाखिला दिलाया था. उस वक्त प्रज्ञानानंद की उम्र 5 साल थी. यहां प्रज्ञानानंद रमेशबाबू और उनकी बहन ने एम.ए. वेलायुधम से शतरंज की बारीकियां सीखीं. इसके बाद से ही दोनों भाई-बहन शतरंज में पूरी तरह रम गए. बीते चार साल से अपने समय के मशहूर खिलाड़ी रहे आर. बी. रमेश उनके कोच हैं. विश्वनाथन आनंद को प्रज्ञानानंद अपना हीरो मानते हैं. प्रज्ञानानंद का लक्ष्य अपनी रेटिंग और खेल में सुधार करते हुए  एक दिन शतरंज का विश्व चैम्पियन बनना है.

राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चेस खेलना काफी खर्चीला होता है. प्रज्ञानानन्द के स्पॉन्सर ऑल इंडिया चेस फेडरेशन के अध्यक्ष और रैमको सिस्टम्स के चेयरमेन पी.आर. वेंकटराम राजा हैं, जो उनकी यात्रा और अन्य स्थानों पर रहने में होने वाले खर्च की व्यवस्था करते हैं.

Information about Praggnanandhaa Rameshbabuप्रज्ञानानंद रमेशबाबू के बारे में जानकारी

  • प्रज्ञानानंद ने वर्ष 2013 में मात्र सात वर्ष की आयु में वर्ल्ड यूथ चेस चैम्पियनशिप का अंडर-8 खिताब जीतकर फीडे मास्टर की उपाधि हासिल की.
  • उन्होंने वर्ष 2015 में वर्ल्ड यूथ चेस चैम्पियनशिप का अंडर-10 खिताब भी जीता.
  • वर्ष 2016 में प्रज्ञानानन्द 10 वर्ष, 10 माह और 19 दिन की उम्र में शतंरज के इतिहास के सबसे कम उम्र के ग्रैंड मास्टर बने.
  • नवम्बर 2017 में विश्व जूनियर शतरंज चैम्पियनशिप में उन्होंने पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया. हालांकि, अगर प्रज्ञानानन्द ने यह टूर्नामेंट जीत लिया होता तो वे सर्गेई कार्जाकिन का रिकार्ड तोड़ने में सफल हो जाते और सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने वाले शख्स बन जाते.
  • 17 अप्रेल 2018 को उन्होंने ग्रीस में हैराक्लियोन फिशर मेमोरियल जीएम नॉर्म टूर्नामेंट में दूसरा ग्रैंडमास्टर नॉर्म अर्जित किया.
  • 23 जून 2018 को प्रज्ञानान्द रमेशबाबू ने ग्रेडिने ओपन में लुका मोरोनी को हराकर तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म प्राप्त किया और ग्रैंडमास्टर बनने वाले विश्व के दूसरे सबसे कम उम्र के शख्स बन गए.

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