Guru Nanak Dev stories in Hindi – गुरु नानक देव

गुरु नानक देव की कहानियां

गुरु नानक देव और शिष्य मरदानाः ज्यादा दान न लें
गुरु नानक देव जी जहां रुकते,  अपना डेरा बस्ती के बाहर ही लगाते और जो भी कंदमूल-फल आदि खाने को मिल जाता, उसी से अपनी भूख मिटाते, किंतु उनके शिष्य मरदाना का पेट फल-फूलों से नहीं भरता था. 
उसे हमेशा अच्छा और स्वादिष्ट भोजन ही भाता था. एक दिन नानकजी ने अनुभव किया कि मरदाना बहुत परेशान है. उन्होंने मरदाना से कहा, ’डेरे पर तुम्हारा मन नहीं लग रहा है, शायद. अच्छा है कि गांव में घूम आओ.’
मरदाना तो यही चाहता था. मरदाना जैसे ही गांव में पहुंचा तो वहां के निवासियों ने उसका दिल खोलकर स्वागत किया. उसे स्वादिष्ट भोजन कराया. तृप्त होने के बाद मरदाना जाने लगा तो गांववासियों ने उसे ढेर सारे कपड़े, अनेक प्रकार के सूखे मेवे उपहार में दिये. उसने बड़ी सी गठरी बांध ली और डेरे पर पहुंच गया.
गुरु नानक देव जी ने उसके कंधे पर बड़ी से गठरी देखी तो मुस्कराये और बोले, ’अरे मरदाना! इतनी बड़ी गठरी कहां से बांध लाये?’ मरदाना ने कहा, ’गुरुजी! गांव वालों ने यह सामान श्रद्धा के साथ भेंट किया है.’
गुरु नानक देव ने कहा, ’मरदाना! हम तो गृहस्थ में रहकर त्याग और उपदेश देते हैं और तुमने त्याग का रास्ता अपना कर इतना लोभ किया.’ मरदाना ने कहा, ’मैंने उनसे कुछ भी मांगा नहीं था, उन्होंने स्वेच्छा ये सब दिया है.’
’ठीक है, किंतु हमें तो अपनी इच्छाओं पर काबू रखना चाहिये।’
गुरु नानक देव जी ने समझाया। ’जिस तरह दान देने वाले को धर्म की कमाई में से दान देना चाहिये, उसी तरह दान लेने वाले को भी उतना ही लेना चाहिये, जितने कि उसे आवश्यकता है. जाओ! इस सामान को जरूरतमंद लोगों में बांट दो.’ मरदाना ने सारा सामान बांट दिया.

गुरु नानक देव के प्रवचनः आशावादी

एक बार गुरु नानक देव काशी के पास एक गांव में प्रवचन कर रहे थे. प्रवचन के बीच में उन्होंने कहा-’सफलता के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आशावादी होना चाहिए. प्रवचन समाप्त होने के बाद एक भक्त ने पूछा-’गुरुजी! क्या किसी चीज की आशा करना ही सफलता की कुंजी है?’
गुरु नानक देव जी ने कहा- ’नहीं, केवल आशा करने से कुछ नहीं मिलता, मगर आशा रखने वाला मनुष्य ही कर्मशील होता है.’
इतना बताने पर भी उस व्यक्ति के समझ में ये बातें नहीं आ रही थीं. उसने कहा- ’गुरुजी! आपकी गूढ़ बातें मेरी समझ में नहीं आ रही हैं.’
उस समय खेतों में गेहूं की कटाई हो रही थी. तेज गर्मी पड़
रही थी. नानकजी ने कहा- ’चलो, मेरे साथ। तुम्हारे प्रश्न का जवाब वहीं दूंगा.’
नानक देव जी उस आदमी को अपने साथ लेकर खेतों में तरफ चले गए. उन्होंने देखा कि एक खेत में दो भाई गेहूं की कटाई कर रहे थे. बड़ा भाई तेजी से कटाई करता हुआ आगे था तथा छोटा भाई पीछे था. नानकजी उस आदमी के साथ वहीं आम के पेड़ के नीचे बैठ गए.
दोपहर हो गई थी. छोटा भाई बोला-’भइया. आज तो पूरी कटाई हो नहीं पायेगी. अभी बहुत बाकी है, कल सुबह आकर काट लेंगे.’
बड़े भाई ने कहा-’अब ज्यादा कहां बचा है, देखता नहीं, थोड़ा ही तो रह गया है. इन दो कतारों को काट लेंगे तो बाकी बारह कतारें रह जाएंगी. इतना तो आराम से काट लेंगे. कल पर क्यों टालता है.’
बड़े भाई की बात सुनकर छोटा भाई जोश में आ गया और उसका हाथ भी तेजी से चलने लगा. थोड़ी देर में पूरी फसल कट गई. फसल कटने के बाद नानकजी वहां से चलने लगे तो भक्त ने कहा-’मेरे प्रश्न का उत्तर तो शेष है.’
नानकजी ने कहा-’तुम्हारे प्रश्न का जवाब तो उन दोनों भाइयों ने दे दिया जो फसल काट रहे थे. बड़ा भाई आशावादी था, तभी तो कटाई पूरी हुई.’ भक्त को प्रश्न का उत्तर मिल गया.

Guru Nanak Quotes in Hindi – गुरु नानक देव के अनमोल वचन

जो गुरु की एक सिखावन सुन लेता है, उसकी मति रत्न, जवाहर और माणिक जैसी बहुमूल्य हो जाती है.

सुनने की कला सीखने नितांत आवश्यक है. गुरु तो चारों तरफ हैं किंतु यदि सुनने की कला नहीं आती है तो सभी सिद्ध पुरुष व्यर्थ हैं. गुरु तो उसी समय उपयोगी होता है जब व्यक्ति में सुनने की सामर्थ्य आ जाए. 

मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मों के बीज बोता है और स्वयं उनके फल खाता है.

जो कोई परमात्मा को छोड़कर स्वयं को कुछ जानता है, वह आगे जाकर परलोक में शोभा नहीं पाता.

खुद पर ही जिसे विश्वास नहीं है,  वह परमेश्वर पर कैसे विश्वास कर सकता है.

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