national nutrition mission in hindi

राष्ट्रीय पोषण मिशन 

भारत में शिशु और महिलाओं में कुपोषण लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या है जिस पर अभी तक काबू नहीं हो पाया है. भारत में शिशु स्वास्थ्य के रास्ते में कुपोषण एक बड़ी बाधा है जिसे भारत सरकार राष्ट्रीय पोषण मिशन के माध्यम से दूर करने का प्रयास कर रही है। भारत सरकार ने कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन (national nutrition mission) शुरू करने के लिए अपनी सहमति दे दी है। 

2017-18 में आरंभ हो रहे राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य कुपोषण अैर जन्म के समय बच्चों का वज़न कम होने जैसी समस्याओं को प्रत्येक वर्ष 2 प्रतिशत तक कम करना है।  national nutrition mission को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और तथा नीति आयोग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाएगा।

राष्ट्रीय पोषण योजना (national nutrition mission) के प्रमुख लक्ष्य

national nutrition mission को 2017-18 में शुरू किया जा रहा है. इस मिशन का सबसे प्रमुख लक्ष्य हरेक साल कुपोषण की समस्या को 2% तक कम करना है।

मिशन का दूसरा प्रमुख लक्ष्य बच्चों में लम्बाई कम बढ़ने की समस्या (स्टंटिंग) को दूर करना है जो पूरी तरह शरीर पर मिलने वाले पोषण पर निर्भर करता है। 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में 38.4% बच्चे स्टंटिंग की वजह से कम कद के रह जाते हैं। national nutrition mission का प्रयास है कि 2022 तक इसे 25% तक लाया जाए।

national nutrition mission का तीसरा प्रमुख लक्ष्य एनीमिया से ग्रस्त छोटे बच्चों, स्त्रियों और किशोरों की संख्या में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की कमी लाना है।

national nutrition mission को आने वाले 3 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

वर्ष 2017-18 के दौरान देश के 315 ज़िलों में यह मिशन काम करेगा।

वर्ष 2018-19 में 235 ज़िले और 2019-20 में देश के सभी ज़िलों में यह शुरू कर दिया जाएगा। 

इस मिशन की मॉनिटरिंग के लिए इसे सूचना एवं प्रौद्योगिकी के एप्लीकेशन्स से भी जोड़ा जाएगा।

इस कार्यक्रम से देश भर में 10 करोड़ से अधिक बच्चों और महिलाओं को लाभ मिलेगा। 


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kuposhan essay in hindi 

क्या होता है कुपोषण Malnutrition?

kuposhan kya hai in hindi कुपोषण या Malnutrition में पौष्टिक भोजन की कमी होने से शरीर कमजोर हो जाता है, उसका पूरा विकास नहीं हो पता है। किसी भी व्यक्ति के शरीर के विकास के लिए प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है. जब किसी के आहार में इन तत्वों की कमी होती है तो शरीर का विकास नहीं हो पाता और कई बीमारियों की वजह से उसकी आयु कम रह जाती है.

क्या हैं कुपोषण के दुष्प्रभाव causes of malnutrition in hindi

कुपोषण की वजह से शरीरक का सम्पूर्ण विकास नहीं हो पाता है. ज्यादातर कुपोषित बच्चों का कद कम रह जाता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और लोग कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। ​शिशुओं की मृत्यु का एक बड़ा कारण कुपोषण ही होता है। महिलाओं में कुपोषण की वजह से एनिमिया और घेंघा रोग होता है। बच्चों में कूपोषण की वजह से सूखा रोग और रतौंधी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।


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भारत में कुपोषण  malnutrition in India

विश्व बैंक के अनुसार भारत का शुमार उन देशों में होता रहा है जहां कुपोषण की समस्या ने गहराई तक जड़ जमा रखे हैं। International Food Policy Research Institute- IFPRI द्वारा जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार 119 देशों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 100वें पायदान पर है और वह उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से भी पीछे है। इससे पहले भारत इस इंडेक्स में 97वें स्थान पर था। इस साल वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत 3 स्थान और पीछे चला गया है। भारत में कम वज़न वाले बच्चों की संख्या उप सहारा अफ्रीका (Sub Saharan Africa) की तुलना में लगभग दोगुनी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पाँच साल से कम उम्र के 38.4% प्रतिशत बच्चे कुपोषण की वजह से कम कद के शिकार हैं, जबकि मां बनने योग्य 51.4% महिलाएँ एनीमिक हैं। भारत में प्रत्येक वर्ष जितनी मौतें होती हैं उनमें 5 फीसदी का कारण कुपोषण है।

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