Success Story of Kidambi Srikant in Hindi

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Srikanth Kidambi: The Player who collapsed the Great Wall of China 

श्रीकांत किदम्बी, जिसने गिरा दी चीन की दीवार

     भारत के टॉप बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल श्रीकांत किदांबी के करियर के लिहाज से वर्ष 2017 सर्वश्रेष्ठ साबित हो रहा है। अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बूते श्रीकांत ने वर्ष 2012 में 338वीं रैंकिंग से वर्तमान में 11वीं वर्ल्ड रैंकिंग तक का शानदार सफर तय किया है। 24 वर्ष के श्रीकांत ने इस वर्ष दो सप्ताह के अंदर ही वर्ल्ड नम्बर वन खिलाड़ी सोन वान हो Son Van Ho को दो बार हराया है। ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज के फाइनल में उन्होंने चीन के ओलम्पिक चैम्पियन चेन लोंग  Chen Long को हराकर साबित कर दिया है कि बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ी अब चीन की दीवार गिराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इससे पहले वे दो सप्ताह के भीतर इण्डोनेशिया ओपन जीत चुके हैं और सिंगापुर ओपन के फाइनल तक पहुंच चुके हैं।

किंदाबी श्रीकांत वर्ल्ड के नंबर-1 खिलाड़ी बन

        बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडेरेशन द्वारा जारी  रैंकिंग के अनुसार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी  किंदाबी श्रीकांत वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं.  श्रीकांत रैंकिंग में नम्बर 1 का ख़िताब पाने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाडी है. किंदाबी श्रीकांत पिछले साल भी चार सुपर सीरीज़ जीती कर नंबर 1 के करीब पहुंचे थे. लेकिन चोट के कारण वे टॉप पर नहीं पहुंच पाए थे. 

श्रीकांत का परिवार Family of Srikanth 

    श्रीकांत का पूरा नाम श्रीकांत नम्मलवार किदम्बी Srikanth Nammalwar Kidambi है और उनका जन्म गुंटूर में 7 फरवरी, 1993 को हुआ था। उनके पिता केवीएस कृष्णा एक किसान और मां राधा गृहिणी हैं। श्रीकांत के बड़े भाई नन्दगोपाल बैंडमिंटन डबल्स के खिलाड़ी हैं।


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करियर की शुरुआत Early days of career 

     श्रीकांत ने भी शुरुआत डबल्स खिलाड़ी के तौर पर ही की थी। गोपीचन्द एकेडमी में शुरुआत के तीन साल उन्होंने डबल्स और मिक्स्ड डबल्स की ही ट्रेनिंग ली। लेकिन कोच पुलेला गोपीचन्द की राय पर वर्ष 2011 में सिंगल्स पर फोकस शुरू किया, जो उनके खेल जीवन के लिए बड़ा बदलाव साबित हुआ। 
     श्रीकांत ने नेशनल सर्किट पर वर्ष 2013 में धमाकेदार एंट्री की, जब उन्होंने उस वक्त देश के सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप को ऑल इंडिया सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप में हराया। इसके बाद श्रीकांत ने थाइलैण्ड ग्रैंड प्रिक्स जीतकर इंटरनेशनल सर्किट पर भी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने टॉप सीड बूनसाक पोन्सना को हराया। वर्ष 2014 मे उन्होंने सिर्फ 21 वर्ष की उम्र में दो बार के ओलम्पिक चैम्पियन लिन डैन को हराकर चाइना ओपन जीता। इस तरह वे सुपरसीरीज प्रीमियर बैडमिन्टन टाइटल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। साथ ही, उन्होंने चीन में भारतीय राष्ट्रगान की धुन बजवाई, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। लिन डैन को आदर्श मानने वाले श्रीकांत के लिए उन्हें हराना करियर का स्वर्णिम पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने कई और टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया, जिसकी बदौलत उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 5 तक पहुंच गई। वर्ष 2014 में ही उन्होंने स्विस ओपन के रूप में अपने करियर का दूसरा ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड टाइटल जीता। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में डेनमार्क के विक्टर एक्जेलसन को हराकर पहली इंडियन ओपन सुपर सीरीज ट्रॉफी जीती। जुलाई 2014 में मेनिन्जाइटिस दिमागी बुखार के कारण उन्हें सप्ताह भर से अधिक समय अस्पताल में गुजारना पड़ा, लेकिन बीमारी ने उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर और बेहतर प्रदर्शन करने का हौसला दिया।

उतार-चढ़ाव भरा करियर Ups and Downs 

    वर्ष 2015 में अपने करियर में उतार-चढ़ावों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ तीसरी रैंकिंग हासिल की। वर्ष 2016 की शुरुआत में श्रीकांत ने सैय्यद मोदी इंटरनेशनल टाइटल जीतकर साबित कर दिया कि वह लम्बी रेस के खिलाड़ी हैं। इससे पहले भी दो वर्ष तक वे इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे थे लेकिन जीत नहीं सके थे। रियो ओलम्पिक के क्वार्टर फाइनल में लिन डैन से हारना श्रीकांत के करियर के लिए बुरे सपने जैसा रहा है। 

गोपीचन्द जैसा बनना चाहते थे 

    गो स्पोर्ट्स फाउण्डेशन वर्ष 2012 से ही उनके करियर को आगे बढ़ाने में आर्थिक मदद करता रहा है। वर्ष 2015 में उन्हें बैडमिंटन में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी सर्वोच्च वर्ल्ड रैंकिंग 3 रही है। लिन डैन के अलावा वे कोच गोपीचन्द को अपना आदर्श मानते हैं। वर्ष 2001 में पुलेला गोपीचन्द ने ऑल इंग्लैण्ड चैम्पियनशिप जीती। श्रीकांत और उनके भाई नन्दगोपाल अपने घर के पास गोपीचन्द के सम्मान समारोह में पहुंचे। वहां गोपीचन्द की मां ने दोनों बच्चों को हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि तुम दोनों को भी बड़े होकर गोपीचन्द जैसा बनना है।

जीवन का फलसफा Philosophy of Life 

     श्रीकांत हार-जीत से विचलित नहीं होने वाले ऐसे मानसिक तौर पर मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं जो बड़े मैचों से भी नहीं घबराता। श्रीकांत ने हाल ही इंडोनेशियन ओपन जीतने के बाद कहा कि-

साल में 12 सुपर सीरीज टूर्नामेंट होते हैं। मैं जानता हूं कि अगर एक फाइनल हार गया तो आगे फिर खेलने का मौका मिलेगा। हारे हुए मैच ही आगे के मैच में जीत का रास्ता तय करते हैं।

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