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महात्मा गांधी के कथन Mahatma Gandhi Quotes

महात्मा गांधी के कथन Mahatma Gandhi Quotes

Table of Contents

महात्मा गांधी के सुविचार- Quotes of Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi Quotes on Self-Power आत्मबल पर महात्मा गांधी के कथन

आत्मा की शक्ति को पहचानना ही आत्मज्ञान है। आत्मा तो बैठे-बैठे दुनिया को लिा सकती है।
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

जिसका आत्मबल पर विश्वास है, उसकी हार नहीं होती, क्योंकि आत्म-बल की पराकाष्ठा का अर्थ है मग्ने की तैयारी।
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

अनुचित इच्छायें तो उठती ही रहेंगी। उनका हम ज्यों-ज्यों दमन करेंगे त्यों-त्यों दृढ़ बनेंगे और हमारा आत्म-बल बढ़ेगा।
-महात्मा गांधी (पत्र जमनादास गांधी को)

पशुबल अस्थायी है और अध्यात्मबल या आत्मबल या चैतनयवाद एक शाष्वत बल है। वह हमेषा रहने वाला है क्योंकि वह सत्य है। जड़वाद तो एक निकम्पी चीज है !
-महात्मा गांधी (प्रार्थना प्रवचन,दिल्ली की प्रार्थना सभा)

आत्मशुद्धि सबसे पहली चीज है, वह सेवा की अनिवार्य शर्त है।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण,गांधी वाड्मय)

आत्मशुद्धि के बिना अहिंसाधर्म का पालन थोथा स्वप्न ही रहेगा।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईष्वर है)

जो व्यक्ति स्वयं अपने सम्मान का ख्याल नहीं करता वह दास ही बन जाता है।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

आत्महत्या का विचार करना सरल है, आत्महत्या करना सरल नहीं।
-महात्मा गांधी (आत्मकथा)

पशु बल अस्थायी है और अध्यात्मबल या आत्मबल या चैतन्यवाद एक शाश्वत बल है। वह हमेशा रहने वाला है, क्योंकि वह सत्य है। जड़वाद तो एक निकम्मी चीज है।
-महात्मा गांधी (प्रार्थना प्रबल)

हमें शरीर के चिकित्सक की बजाय आत्मा के चिकित्सकों की आवश्यकता है।
-महात्मा गांधी (मोहन माला)

आध्याात्मिक अनुभव विचार से भी अधिक गहरे होते हैं।
-महात्मा गांधी (सलेक्शन्स फ्राम गांधी)

आर्यसमाज की विवादग्रस्त बाते समय आने पर विस्मृत हो जायेगी, लेकिन आर्यसमाज और महर्षि दयानन्द ने हिन्दु समाज की सेवा की है वह सदा अमर रहेगी।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय)

मेरे मत में, आर्यसमाज हिन्दु धर्म की शाखा है और हर एक आर्यसमजी हिन्दु ही है।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय,)

हम अपनी पीठ स्वयं नहीं देख सकते, किन्तु अगर दूसरे हसे देखकर गन्दगी की बात हमें बतायें, तो हम उसे भी सुनना चाहते।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय)

जब हम कुछ भी लेते हैं, तब दूसरों के मुंह से निकालते है। इसलिए हरेक चीज लेने के समय हम देखें कि आवश्यक चीज ही लें और आवश्यकता कम-से-कम रखें।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

Mahatma Gandhi Quotes on God – आशा पर महात्मा गांधी के सुविचार

आशावाद आस्तिकता है। सिर्फ नास्तिक ही निराशावादी हो सकता है।
-महात्मा गांधी (नवजीवन)

संतो की वाणी सुनो, शास्त्र पढ़ो, विद्वान हो लो, लेकिन अगर ईश्वर को हृदय में स्थान नहीं दिया तो कुछ नहीं किया।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

आस्था तर्क से परे की चीज है। जब चारों ओर अंधेरा ही दिखाई पड़ता है और मनुष्य की बुद्धि काम करना बन्द कर देती है उस समय आस्था की ज्योति प्रखर रूप से चमकती है और हमारी मदद को आती है।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय, खंड)

धन ओर ईश्वर में बनती नहीं। गरीब के घर में ही प्रभु निवास करते हैं।
-महात्मा गांधी (इंडियन ओपीनियन)

आदमी जितना असमर्थ है, भगवान उतना ही समर्थ है। उसकी कृपा अपरम्पार है और वह हजार हाथों में मदद करता है।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

भूख से मरते बेकार लोगों का परमेश्वर तो योग्य काम और उससे मिलने वाली रोटी ही है, उनके लिए परमेश्वर का यही एकमात्र स्वीकार्य रूप हो सकता है।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

आपको अपने सिवा किसी पर भी विश्वास नहीं करना है। आपको भीतर की आवाज सुनने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन यदि आप उसके लिए भीतर की आवाज शब्द प्रयुक्त न करना चाहे तो आप ‘विवेक का आदेश’ शब्द प्रयुक्त कर सकते हैं। और यदि आप ईश्वर को प्रदर्शित नही करते हैं तो मुझे इसमें जरा भी सन्देह नहीं है कि आप किसी और चीज को प्रदर्शित करेंगे जो अन्त में ईश्वर सिद्ध होगी, क्योंकि सौभाग्य से इस संसार में ईश्वर के सिवा कुछ और है ही नहीं।
-महात्मा गांधी (अस्पृश्यता पर व्यक्तव्य)

ईश्वर को नहीं मानने से सबसे बड़ी हानि वही है, जो हानि अपने को न मानने से हो सकती है। अर्थात् ईश्वर को न मानना आत्महत्या के समान है।
-महात्मा गांधी

सच पूछो तो हम सब द्रौपदी की ही स्थिति में हैं। हमारी लाज कोई मनुष्य नहीं ढंक सकता, उसे तो ईश्वर ही ढँक सकता है। ऐसा जरूर होता है कि वह अपनी सहायता मनुष्य के द्वारा भेजता है, किन्तु मनुष्य तो निमित मात्र है।
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय)

ईश्वर को नाम की जरूरत नहीं। वह और उसके, नियम दोनों एक ही हैं। इसलिए ईश्वरीय नियमों का पालन ही ईश्वर का जप है।
-महात्मा गांधी (हरिजन सेवक)

ईश्वरीय प्रकाश किसी एक ही राष्ट्र या जाति की सम्पत्ति नहीं है।
-महात्मा गांधी (हिन्दी नवजीवन)

मेरा ईश्वर तो मेरा सत्य और प्रेम है। नीति और सदाचार ईश्वर है। निर्भयता ईश्वर है। ईश्वर जीवन और प्रकाश का मूल है। फिर भी वह इन सबसे परे है। ईश्वर अन्तरात्मा ही है। वह तो नास्तिकों की नास्तिकता भी है।
-महात्मा गांधी (हिन्दी नवजीवन)

ईश्वर न तो ऊपर स्वर्ग में है, न नीचे किसी पाताल में; वह तो हर-एक के हृदय में विराजमान है।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है)

ईश्वर एक अनिर्वचनीय रहस्यमयी शक्ति है, जो सर्वत्र व्याप्त है; मैं उसे अनुभव करता हूँ, यद्यपि देखता नहीं हूँ।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है,)

ईश्वर जीवन है, सत्य है, और प्रकाष है। वही प्रेम है; वही परम मगंल है।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है)

ईश्वर की असंख्य व्याख्याएँ हैं, क्योंकि उसकी विभूतियाँ भी अगणित है।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है)

ईश्वर के सामने हम सभी गोपियाँ हैं। ईश्वर स्वयं न रन है, न नारी है, उसके लिए न पंक्तिभेद है, न योनिभेद है। वह ‘नेति-नेति’ है। वह हृदयरूपी वन में रहता है और उसकी वंसी है अंतरनाद।
-महात्मा गांधी (प्रार्थना-प्रवचन, दिल्ली की प्रार्थना सभा)

जो ईश्वर को अपने पास समझता है वह कभी नहीं हारता।
-महात्मा गांधी (दिल्ली की प्रार्थना सभा)

जीवमात्र ईश्वर के अवतार हैं, परन्तु लौकिक भाषा में हम सबको अवतार नहीं कहते। जो पुरूष अपने युग में सबसे श्रेष्ठ धर्मवान पुरूष होता है, उसे भविष्य की प्रजा अवतार के रूप में पूजती है। इसमें मुझे कोई दोष नहीं मालूम होता।
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय)

आश्चर्य है, वैद्य मरते है, डाॅक्टर मरते हैं, उनके पीछे हम भटकते है। लेकिन राम जो मरता नहीं है, हमेशा जिन्दा रहता है और अचूक वैद्य है, उसे हम भूल जाते हैं।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

पढ़ने की बीमारी वाले मैने यहां और दूसरी जगह बहुत देखे है। यह रोग तुम्हें भी सत्ता रहा है। इस रोग से मुक्त होने के लिए भ्रमण करो, ईष्वर की लीला देखो, कुदरत की किताब पढ़ो, पेड़ों की भाषा समझो, आकाश में होने वाला गाना सुनो, वहां रोज रात को होने वाला नाटक देखो। दिन में कातो, थकावट लगे तब सोओ, अच्छा काम हो सके तो करो, मोची का काम करो।
-महात्मा गांधी (बालजी देसाई को पत्र)

अनशन भी राक्षसी हो सकता है।
-महात्मा गांधी (प्रार्थना प्रवचन दिल्ली की प्रार्थनासभा)

Mahatma Gandhi’s views on Selfless – अनासक्ति पर महात्मा गांधी के विचार

बगैर अनासक्ति के न मनुष्य सत्य का पालन कर सकता है, न अहिंसा का।
-महात्मा गांधी (एक पत्र)

अनासक्ति की एक परीक्षा है कि मनुष्य रामनाम लेकर सोने के समय एक क्षण में सो सकता है।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

काम करने पर भी उसका बोझ न लगे, यह अनासक्ति का रूप है।
-महात्मा गांधी (बापू के पत्र प्रेमा बहन के नाम)

जगत् मात्र की सेवा करने की भावना पेदा होने के कारण अनासक्ति सहज ही आ जाती है।
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

सबकी सेवा करनी हो, तो वह अनासक्तिपूर्वक ही हो सकती है।
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

जो मनुष्य यह मेरा और वह तेरा मानता है, वह अनासक्त नहीं हो सकता।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

आत्मसंयम, अनुशासन और बलिदान के बिना राहत या मुक्ति की आशा नहीं की जा सकती। अनुशासनहीन बलिदान से भी काम नहीं चलेगा।
-महात्मा गांधी

Mahatma Gandhi Quotes on Truth – सत्य पर महात्मा गांधी के सुविचार

सुवर्ण नियम यह है कि जो चीज लाखों को नही मिल सकती, उसे लेने से हम दृढ़तापूर्वक इनकार कर दें।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर)

अफवाह सुनना नहीं, सुनना तो मानना नही।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

मेरे सामने जब कोई असत्य बोलता है तब मुझे उस पर क्रोध होने के बजाय स्वयं अपने ही ऊपर अधिक कोप होता है,क्योंकि में जानता हूं कि अभी मेरे अन्दर-तह में-असत्य का वास है।
-महात्मा गांधी (हिन्दी नवजीवन)

सबसे अच्छा तो यही है कि झूठ का कोई जवाब ही न दिया जाए। झूठ अपनी मौत मर जाता है। उसकी अपनी कोई शक्ति नहीं होती। विरोध पर वह फलात-फूलता है।
-महात्मा गांधी (हरिजन सेवक)

खुशामद और शुद्ध सेवा में उतना अन्तर है जो झूठ और सच में है.
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय)

मनुष्य अपनी कम से कम जरूरत से ज्यादा जितना भी लेता है, वह चोरी करता है.
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईष्वर है)

Mahatma Gandhi Quotes on Caste System and Untouchablity – छुआछूत पर महात्मा गांधी के कथन

हम सब ऋषियों की संतान हें और इसलिए हमारे मनों में अपने पुरोहित या किसी वर्ण विशेष का होने के कारण अभिमान नही होना चाहिए।
-महात्मा गांधी

सच्चा अर्थशास्त्र तो न्याय-बुद्धि पर आधारित अर्थशास्त्र है।
-महात्मा गांधी (इंडियन ओपेनियन)

अविश्वास भी डर की निशानी है।
-महात्मा गांधी (गांधीवाणी)

जो हिन्दू अद्वैतवाद का मनाया है, वह अस्पृश्यता को कैसे मान सकता है ?
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय)

आज हम जिसे अस्पृश्यता मानते है उसके लिए शास्त्र में कोई प्रमाण नहीं है।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय)

अस्पृश्य तो वे है जो पापात्म होते है। एक सारी जाति को अस्पृश्य बनाना एक बड़ा कलंक है।
-महात्मा गांधी (प्रार्थना प्रवचन)

जो हम करते है वह दूसरे भी कर सकते है-ऐसा मानें। न मानें तो हम अहंकारी ठहरेंगे।
-महात्मा गांधी (नवजीवन)

कई बार तो जाति से निकाला जाना स्वागत करने की चीज होती है; जिस जाति के पंच अन्याय करके अपना बड़प्पन खो बैठते है, उस जाति में रहना तो अनीतिमय राज्य में रहने के बराबर है। इससे पहले कि जाति उसका बहिष्कार करे, व्यक्ति को स्वयं जाति से अपना सम्बन्ध तोड़ लेना चाहिए, और उपजातियों को तो हर हालत में समाप्त कर देना ही इष्ट है.
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय)

Mahatma Gandhi Quotes on Non Violence – अहिंसा पर महात्मा गांधी महात्मा गांधी के कथन

अहिंसात्मक युद्ध में अगर थोड़े भी मर मिटने वाले लड़ाके होंगे तो वे करोड़ो की लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूकेंगे। अगर यह मेरा स्वप्न है, तो भी मेरे लिए मधुर है।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

अहिंसा सत्य का प्राण है। उसके बिना मनुष्य पशु है।
-महात्मा गांधी (हिन्दी नवजीवन)

मेरे अहिंसा का सिद्धांत एक अत्यधिक सक्रिय शक्ति है। इसमें कायरता तो दूर, दुर्बलता तक के लिए स्थान नहीं है। एक हिंसक व्यक्ति के लिए यह आशा की जा सकती है कि वह किसी दिन अहिंसक बन सकता है, किन्तु कायर व्यक्ति के लिए ऐसी आशा कभी नहीं की जा सकती है। इसी लिए मैने इन पृष्ठ में अनेक बार कहा है कि यदि हमें अपनी, अपनी स्त्रियों की, और अपने पूजास्थानों की रक्षा सहनशीलता की शक्ति द्वारा अर्थात् अहिंसा द्वारा करना नहीं आता, तो अगर हम मर्द हैं तो, हमं इन सबकी रक्षा लड़ाई द्वारा कर पाने में समर्थ होना चाहिए।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

अहिंसा श्रद्धा और अनुभव की वस्तु है, एक सीमा से आगे तर्क की चीज वह नहीं है।
-महात्मा गांधी (हरिजन)

सत्यमय बनने का एकमात्र मार्ग अहिंसा ही है।
-महात्मा गांधी (आत्मकथा)

अहिंसा केवल बुद्धि का विषय नहीं है, यह श्रदा और भक्ति का विषय है। यदि आपका विश्वास अपनी आत्मा पर नहीं, ईश्वर और प्रार्थना पर नहीं, तो अहिंसा आपके काम आने वाली चीज नहीं है।
-महात्मा गांधी (गांधी सेवा संघ सम्मेलन)

अहिंसा श्रेष्ठ मानव-धर्म है, पशुबल से वह अनन्त गुना महान् और उच्च है।
-महात्मा गांधी

जो बात शुद्ध अर्थशास्त्र के विरूद्ध हो, वह अहिंसा नही हो सकती। जिसमें परमार्थ है वही अर्थशास्त्र शुद्ध है। अहिंसा का व्यापार घाटे का व्यापार नहीं होता।
-महात्मा गांधी (संपूर्ण गांधी वाड्मय)

अहिंसा और प्रेम एक ही चीज है।
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है)

Mahatma Gandhi Quotes on Guru – गुरू पर महात्मा गांधी के कथन

गुरू में हम पूर्णता की कल्पना करते हैं। अपूर्ण मनुष्यों को गुरू बना कर हम अनेक भूलों के शिकार बन जाते है.
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय भाग)

श्री गोखले का नाम मेरे लिए एक पवित्र नाम है। वे मेरे राजनीतिक गुरू है. वे स्फटिक के समान शुद्ध, मेमने की भाँति विनम्र और सिंह के समान शूर थे। उनमें उदारता तो इतनी थी की वह एक दोष बन गई थी.
-महात्मा गांधी (श्रद्धा का स्वरूप यंग इंडिया)

हिन्दुस्तान का हर एक घर विद्यापीठ है, महाविद्यालय है, मां-बाप आचार्य हैं। मां-बाप ने आचार्य का यह काम छोड़कर अपना धर्म छोड़ दिया है.
-महात्मा गांधी (गुजरात महाविद्यालय के उद्घाटन पर भाषण)

Mahatma Gandhi Quotes on Charkha – चरखे पर महात्मा गांधी के कथन

चरखा हिन्दू-मूसलामन-ऐक्य की, हमारी अहिंसा की, हमारे नियम-पालन की, हमारी परिश्रमशीलता की, योजना-षक्ति की, हमारी व्यापारिक शक्ति की, हमारी परोपकारवृत्ति की, निर्धनों के प्रति हमारे प्रेम की और अपने स्त्री वर्ग की रक्षा करने की हमारी इच्छा की निशानी है.
-महात्मा गांधी (नवजीवन)

कवि और किंकर, मालिक और मजदूर, सेठ और नौकर, सेठानी और दासी सब को लोक-कल्याण के अर्थ श्रम अवश्य करना चाहिए। करोड़पति भले अपने लिए शरीर श्रम न करे, चरखा न चलाये, लेकिन उसे देश के अर्थ, लोक के अर्थ, चरखा चलाना ही चाहिए, नहीं तो ‘गीता’ के वाक्य के अनुसार वह व्यर्थ ही जीता है.
-महात्मा गांधी (नवजीवन)

Mahatma Gandhi Quotes On Democracy – लोकतंत्र पर महात्मा गांधी के विचार

मेरी कल्पना का प्रजातन्त्र वह है जिसमें अत्यन्त दुर्बल लोगों को वही अवसर प्राप्त हों जो अत्यन्त बलवानों को प्राप्त हैं.
-महात्मा गांधी (फार पैसिफिट)

अनुशासन और विवेकयुक्त जनतन्त्र दुनिया की सबसे सुन्दर वस्तु है.
-महात्मा गांधी (मेरे सपनों का भारत)

बाहरी नियन्त्रणों के तनाव में लोकतन्त्र टूट जाएगा.
-महात्मा गांधी (मोहनमाला)

हमें अपने प्रिय नेताओं के प्रति स्नेह प्रकट करना चाहिए-सार्थक कार्यो और अथक शक्ति के द्वारा। जो प्यार अपने प्रिय के चरण छूने ओर उसके पास पहुँचकर शोर मचाने से संतुष्ट हो जाता है, भय है कि वह धीरे-धीरे उसके लिए जानलेवा भी हो सकता है.
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

Mahatma Gandhi Quotes on Life- जीवन पर महात्मा गांधी के सुविचार

जन्म और मृत्यु दो भिन्न स्थितियाँ नहीं है, बल्कि एक ही स्थिति के दो अलग पहलू हैं.
-महात्मा गांधी (सत्य ही ईश्वर है,)

यदि श्रद्धापूर्वक कोई भी आदमी जप जपेगा, तो अंत में वह स्थिरचित होगा ही.
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

अच्छे गवैये स्वर तो ऊँचा या नीचा वही पकड़ते हैं, जिसे वे अच्छी तरह निभा सकें, मगर उस पर सारा जोर लगा देते हैं। तभी उनके गाने में पूरी मिठास और लोच आती है। यही हाल कर्मकला का है। कर्म छोटा किया जाये या बड़ा, यह तो अपनी-अपनी शक्ति पर निर्भर है.
-महात्मा गांधी

जो जीवन का लोभ छोड़कर जीता है, वही जीता है
-महात्मा गांधी (गांधी वाणी)

भूलों से संग्राम करना ही जीवन है.
-महात्मा गांधी (मेरी भूल, यंग इंडिया)

जीवन रूपये से बड़ी चीज है.
-महात्मा गांधी (रचनात्मक कार्यक्रम)

जीवन का सच्चा ध्यये जीवन की सार्थकता है.
-महात्मा गांधी (गांधी विचार रत्न)

जीवन का संपूर्ण सौंदर्य तभी खिल सकता है, जब हम उच्च कोटि का जीवन जीना सीखे.
-महात्मा गांधी (मेरे सपनों का भारत)

जिन्दगी मौत की तैयारी है.
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

Mahatma Gandhi Quotes on Books- किताबों पर महात्मा गांधी महात्मा गांधी के कथन

तुम्हारे ज्ञान की कीमत तुम्हारे कामों से होगी। सैकड़ों किताबें दिमाग में भर लेने से कुछ लाभ मिल सकता है किन्तु उसकी तुलना में काम की कीमत कई गुना ज्यादा है। दिमाग में भरे हुए ज्ञान की कीमत उसके अनुसार किये गये काम के बराबर ही है। बाकी का सब ज्ञान दिमाग के लिए व्यर्थ का बोझ है.
-महात्मा गांधी (भाषण भागलपुर में)

इतना जान लो कि स्वर्ग का जितना अधिकार वेदों के ज्ञाता को है उतना ही अधिकार भंगी का काम करने वालों को है। किन्तु यदि वेदों का ज्ञाता कोरा पण्डित या पाखण्डी हो तो वह चाहे जितना बड़ा विद्वान क्यों न हो, फिर भी नरक में पडे़गा और भंगी ‘ब्रह्म’ शब्द न जानते हुए भी यदि ईश्वरार्पण बुद्धि तथा सेवा-भाव से रोज पाखाना साफ करे तो अवश्य ऊँचा उठ जायेगा.
-महात्मा गांधी (पत्र गंगा बहन वैद्य को)

Mahatma Gandhi Quotes on Sacrifice – त्याग पर महात्मा गांधी महात्मा गांधी के कथन

जो मनुष्य त्याग करता है और दुःख मानता है, उसने त्याग किया ही नही है, सच्चा त्याग सुखद होता है, मनुष्य को ऊँचा ले जाता है.
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

त्याग के क्षेत्र की सीमा ही नहीं है.
-महात्मा गांधी (आत्मकथा)

वैराग्हीन त्याग, त्याग नहीं है.
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

Mahatma Gandhi Quotes on Geeta ‘गीता’ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी महात्मा गांधी के कथन

‘गीता’ की ही शरण लेकर गांधीजी ने भारत को आजाद कराया और राष्ट्रपिता की उपाधि प्राप्त की। वो प्रतिदिन गीता का अध्ययन करते थे। गीता उनके शारीरिक, मानसिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत और आधार नही। उन्होंने कहा है-

‘गीता’ मेरी बाइबिल या कुरान ही नहीं, उससे भी महान है, ये मेरी माता है। मैंने बहुत पहले ही अपने सांसारिक-मां को खो दिया था। लेकिन मेरी शाष्वत-माँ ‘गीता’ ने पूरी तरह, सर्वदा के लिए उस स्थान को भरे रखा। वो कभी नहीं बदली, उन्होंने मुझे कभी भी हराने नहीं दिया। जब भी मैं हताश और निराश होता हूँ, गीताा-माँ की गोद में शरण लेता हूँ।’’

-महात्मा गांधी

‘‘मैं चाहता हूँ, ‘गीता’ केवल राष्ट्रीय शालाओं में ही नहीं बल्कि प्रत्येक शिक्षण संस्थाओं में पढ़ायी जाय। एक हिन्दु बालक या बालिका के लिए ‘गीता’ को न जानना शर्म की बात होनी चाहिए।’’

-महात्मा गांधी

‘‘मैं स्वीकार करता हूँ कि जब मै संशयग्रस्त होता हूँ, निराशा मुझको घेर लेती है और क्षितिज में आशा की एक भी किरण नहीं दिखाई पड़ती, तब मैं भगवद्गीता की शरण लेता हूँ। एक शान्तिप्रदायक श्लोक पढ़ता हूँ और उन भारी दुःखों के बीच, मैं तुरंत मुस्कुराने लगता हूँ।

-महात्मा गांधी

Mahatma Gandhi Quotes on Bibel – बाइबल पर महात्मा गांधी महात्मा गांधी के कथन

मैने ‘बाइबिल’ को समझने का प्रयत्न किया है. मैं उसे धर्मशास्त्र में गिनता हूँ. मेरे हृदय पर जितना अधिकार ‘भगवद्गीता’ का है, उतना ही अधिकार ‘सरमन आन द माउन्ट’ का भी है. ‘लीड काइंडली लाइट’ तथा अन्य अनेक प्रेरणा-स्फूत्र्त प्रार्थना-गीाता मैं किसी ईसाई धर्मावलम्बी से कम भक्ति के साथ नही गाता हूँ.
-महात्मा गांधी (मद्रास में स्वदेशी पर भाषण,)

यूरोप की जनता ईसाई कहलाती है लेकिन वह ईसा के आदेश को भूल गयी है. भले ही वह ‘बाइबिल’ पढ़े, भले ही वह हिब्र का अभ्यास करे, लेकिन ईसा के आदेशानुसार वह आचरण नही करती. पश्चिम की हवा ईसा के आदेशों के विरूद्ध है. पश्चिम की जनता ईसा को भूल गई है.
-महात्मा गांधी (भाषण नवसारी में)

Mahatma Gandhi Gretest Quotes – महात्मा गांधी के महान विचार

मनुष्य जीवन का उद्देष्य आत्मदर्शन है। और उसकी सिद्धि का मुख्य एवं एकमाात्र उपाय पारमार्थिक भाव से जीव-मात्र की सेवा करना है, उसमें तन्मयता तथा अद्धैत के दर्शन करना है।
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड् मय)

दूध में जहर है तो हम दूध को फेंकते है। उस तरह अच्छे के साथ पाखंड रूप जहर है तो उसे फेंको.
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

तपस्या धर्म का पहला ओर अन्तिम चरण है.
-महात्मा गांधी (भड़ौंच में भाषण)

अतिशय तर्क वितर्क से बुद्धि तेजस्वी नहीं बनती, तीव्र भले ही होती हो.
-महात्मा गांधी (नवजीवन)

लार्ड कर्जन ने चाय पीने का फैशन शुरू किया और आज यह हत्यारी बूटी सारे राष्ट्र को निगल लेने पर उतारू है। यह लाखों स्त्री-पुरूषों का हाजमा बिगाड़ चुकी है और उनकी तंगदिली को बढ़ा रही है.
-महात्मा गांधी (मद्रास में ‘स्वदेशी’ पर भाषण)

हम बड़ी बातों को न सोचें, अच्छी सोचें.
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

एक सैनिक यह चिन्ता कब करता है कि उसके बाद उसके काम का क्या होगा ? वह तो अपने वर्तमान कर्तव्य की ही चिन्ता करता है.
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी वाड्मय)

भूतकाल हमारा है, हम भूतकाल के नहीं है। हम वर्तमान के है और भविष्य को बनाने वाले है, भविष्य के नहीं।
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

आशा का उल्लघंन सद्गुण केवल तभी हो सकता है जब वह किसी अधिक उँचे उद्देश्य के लिए किया जाये और उसमें कटुता, द्वेष या क्रोध न हो।
-महात्मा गांधी (यंग इंडिया)

अपने गुण आप देखें और उसकी स्तुति दूसरों से करें, उससे बढ़के नीचता कैसी होगी ?
-महात्मा गांधी (बापू के आशीर्वाद)

आत्म-विश्वास का अर्थ है अपने काम में अटूट श्रद्धा।
-महात्मा गांधी (महादेव भाई की डायरी)

आत्मविश्वास रावण का-सा नहीं होना चाहिए जो समझता था कि मेरी बराबरी का कोई है ही नहीं। आत्मविश्वास होना चाहिए विभीषण-जैसा, प्रह्नाद-जैसा। उनके जी में यह भाव था कि हम निर्बल है मगर ईश्वर हमारे साथ है और इस कारण हमारी शक्ति अनंत है।
-महात्मा गांधी (सम्पूर्ण गांधी, वाड्मय)

जो नरसी मेहता की भाषा है, जिसमें नंदषंकर ने अपना ‘करणघेलो’ उपन्यास लिखा, जिसमें नवलराम, नर्मदाषंकर, मणिलाल, मलबारी आदि लेखक अपना साहित्य लिख गये हैं, जिस भाषा में स्व० राजचन्द्र कवि ने अमृतवाणी सुनाई है, हिन्दु, मुसलमान और परसी जातियां जिस भाषा की सेवा करती हैं, जिसके बोलने वालों में पवित्र साधु-सन्त हो चुके हैं, जिस भाषा को बोलन वालों में धन भी प्रचुर है और जिसमें जहाजों द्वारा परदेश में व्यापार करने व्यापारी भी है, जिसमें मुल माणिक और जोधा माणिक की बहादुरी की प्रतिष्ठान काठियावाड़ के के बरड़ा पहाड़ में आज भी गूंजती है, उस भाषा के विकास की सीमा नहीं बांधी जा सकती है.
-महात्मा गांधी (भड़ौच में भाषण)

मोती तो जहां मिले, वहां से ले लेने चाहिए.
-महात्मा गांधी (प्रार्थना प्रवचन)

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