Baby Food Chart in Hindi

बच्चों का ठोस आहार और सन्तुलित भोजन

नवजात शिशु के लिए मां का दूध ही सम्पूर्ण आहार होता है. लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कई मिनरल्स और विटामिन्स की जरूरत होती है, जिनकी पूर्ति सिर्फ मां के दूध से संभव नहीं है. इसलिए बच्चों का मां के दूध के साथ धीरे-धीरे थोड़ी मात्रा में ठोस आहार देना भी शुरू करना चाहिए.

बच्चों को ठोस आहार क्यों दें

ऐसे कई मिनरल व विटामिन हैं जो कि दूध में कुदरती ही कम होते हैं,फिर चाहे मां का दूध हो या कोई और. विशेषतया विटामिन डी, विटामिन सी और आयरन की पूर्ति दूध से संभव नहीं है. ठोस आहार से ही इनकी पूर्ति होगी और बच्चे का पेट ठीक से भरेगा. इस तरह शुरू कर बच्चे को धीरे-धीरे संतुलित भोजन देने की शुरुआत की जा सकती है.

ठोस आहार कब शुरू करें

ठोस आहार शुरू करने के लिए बच्चे की स्थिति के मुताबिक 4 से 6 महीने की उम्र ठीक रहती है. अब आपके बच्चे का इतना विकास हो चुका है कि वह ठोस आहार को निगल सकता है तथा उसकी पाचन शक्ति भी विकसित हो चुकी है. इस समय आप वैसे भी पोलियो-डीपीटी की तीसरी खुराक के लिए डॉक्टर के पास जायेंगे. उसी समय आप बच्चे का ठोस आहार शुरू करने के बारे में भी सलाह ले सकते हैं.
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कौन सा ठोस आहार दे सकते हैं

शुरूआत में तरल चीजें जैसे मौसमी का रस, दाल का पानी ठीक रहता है. उसके बाद अर्ध-ठोस तथा ठोस आहार दिये जा सकते हैं.

4 to 6 month baby food chart in Hindi

4 से 6  महीने के बच्चे का आहार

-मौसमी अथवा सन्तरा का रस एक-दो चम्मच सुबह व शाम से शुरू करें. फिर बढ़ाते रहें. चाहे तो उबले-ठण्डे पानी से पतला कर सकते हैं. सर्दियों में चाहे तो हल्का गर्म कर सकते हैं परन्तु ज्यादा गर्म न करें वरना विटामिन-सी नष्ट हो सकता है.
-दाल का पानी, विषेषतया मूंग/अरहर की दाल का पानी हल्दी और नमक डाल कर दे सकते हैं. बाकी मसाले नहीं दें. कुछ समय बाद दाल के दाने भी पानी के साथ दे सकते हैं.
-चावल का मांड भी दाल के पानी में मिला सकते हैं. चावल की मात्रा धीरे-धीरे कर बढ़ाते रहें.
– बाजार में उपलब्ध बने बनाये मिश्रण भी सुविधाजनक, संतुलित रहते हैं हालांकि घर की खुराक व सामग्री से कुछ महंगे पड़ते हैं. एक चम्मच पाउडर में दो-चार चम्मच उबला पानी मिलायें व चटायें. मात्रा धीरे-धीरे बढ़ायें.
– दही, योगर्ट अथवा मथा हुआ दही-केला भी दे सकते हैं.
– केला, आम, सेब का स्ट्यू, पपीता, चीकू, अंगूर का रस भी अल्प मात्रा में दे सकते हैं.

Baby food chart after 6 months

6  महीने के बाद बच्चे का आहार

छह महीने का होने के बाद बच्चे को कस्टर्ड-फल के साथ, सब्जियों का सूप, चावल की फीरनी, मूंग की दाल का चीला, सेब का स्ट्यू, चावल के पोहे, दूध और बिस्किट, पालक का शोरबा अथवा गाजर, टमाटर, पालक, लौकी का सूप, टमाटर का रस, खिचड़ी, सूजी का उपमा अथवा हलवा, उबले आलू, दलिया, चावल की खीर थोड़ी मात्रा में दे सकते हैं.

10 month baby food

10 महीने से 1 साल तक के बच्चे का आहार

 जो चीजें ऊपर बताई गई हैं, उनकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाये. सब्जी, दाल अथवा दही के साथ रोटी भी मैश करके खिला सकते हैं. ब्रेड भी मक्खन या जैम के साथ खिला सकते हैं. यदि नॉन-वेजेटेरियन हैं तो मीट, मछली या चिकन का सूप भी दे सकते हैं. अंडे की भुज्जी या उबला अंडा भी खिला सकते हैं. ध्यान रखें कि शुरूआत में सिर्फ अण्डे की जर्दी ही खिलाएं क्योंकि कभी-कभी सफेद से एलर्जी हो सकती है. आम धारणा है कि अण्डा गर्मी करता है, इसलिये गर्मी में नहीं खाना चाहिए, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

12 month baby food chart

एक वर्ष के बाद बच्चे का आहार

जो आप खाते हैं, अब आपका बच्चा भी वह सब कुछ खा सकता है. स्वाभाविक है कि आपको अपनी स्वयं की खुराक को अब सोच-समझ के पौष्टिक एवं संतुलित रखना होगा.

बच्चों को खाना खिलाने में आने वाली दिक्कतें

बच्चा खाना नहीं खाता

याद रखिये यह बच्चे लिए परिवर्तन का समय है. कुछ नापसन्दी व दिक्कत स्वाभाविक है. कुछ समय रूक जाइये, फिर वापिस कोशिश कीजिये या कोई नयी चीज आजमाइये. बिल्कुल भी जोर जबरदस्ती मत कीजिये

बच्चा खाने के बाद उल्टी कर देता है

शुरू में ऐसा होना स्वाभाविक है, ज्यादातर बच्चों के साथ ऐसा होता है. इस समस्या को कम करने के लिए बच्चों को खाने की मात्रा कम कर सकते हैं, परन्तु बार- बार दें. खाना जीभ के पीछे हिस्से पर रखें, आगे नहीं. आहार को और पतला करके भी खिला सकते हैं.

बच्चा पूरा मुंह नहीं खोलता

इस स्थिति में छोटा चम्मच काम में लें. चम्मच की जगह मक्खन फैलाने का स्प्रेडर या आइस्क्रीम की स्टिक काम में लें.

बच्चा बिना दूध पीये आहार नहीं लेता

याद रखिये अभी तक आपके बच्चे को यही आदत है कि समय-समय पर दूध मिलेगा और इससे पेट भी भरेगा. अपने आहार को बच्चे की इसी उम्मीद में ढालिये. पहले दूध देकर फिर बीच में आहार भी दे दीजिये. उसका मन भी मान जायेगा तथा उसको यह भी लगने लगेगा कि आहार से भी पेट भरेगा.
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बच्चों को आहार देते समय जरूरी सावधानियां

बच्चों को ठोस आहार शुरू करने में सबसे जरूरी बात धैर्य है. विश्वास जल्दी करेंगे तो और दिक्कत आयेगी. स्वयं में एवं अपने बच्चे में विश्वास रखिये.  इसको जरा ऐसे सोचिये कि आपको रोटी सब्जी खाने की आदत है और आपको एकदम कहा जाये कि दूध से ही काम चलाइये तो आपको कुछ समय जरूर अजीब लगेगा. आपके बच्चे को भी ठीक ऐसा ही लगेगा और फिर वह तो बच्चा है.
ध्यान रखें कि एक ही दिन में दो नयी वस्तुयें ना आजमायें. कोई खास परेशानी, एलर्जी या पेट खराब होने पर डॉक्टर से पूछें.

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