Festivals & Days of March 2019 मार्च  के त्यौहार और खास दिन

इस वर्ष मार्च March 2019 के महीने में महाशिवरात्रि mahashivratri, होली Holi,धुलंडी Dhulandi,संत तुकाराम जयंती Sant Tukaram Jayanti, राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस world Vaccination  Day, विश्व थिएटर डे world theater day, पापमोचनी एकादशी Papmochni Ekadashi,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस world women day,शीतला अष्टमी(बसोड़ा) Shitla Asthmi, ब्रिज महोत्सव Braj mahotsav 2019,Fagotsav at Govind Dev ji Mandir Jaipur,राजस्थान दिवस Rajasthan Day 2019  प्रमुख हैं.

महाशिवरात्रि   Mahashivratri  

महाशिवरात्रि 4 मार्च को मनायी जाएगी. हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि का त्यौहार देश भर में पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. महाशिवरात्रि देवों के देव महादेव की पूजा और उपासना का प्रमुख त्यौहार है. महाशिवरात्रि को शिव की आराधना की रात यानी शिव- रात्रि भी कहा जाता है. इस दिन सभी शिव मंदिरों में कैलाशपति भगवान शिव का अभिषेक और पूजा अर्चना की जाती है और ओम नमः शिवाय के जयकारे लगाए जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस International Women’s Day  

हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. 1975 में पहली बार यूनाइटेड नेशन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था.पहले अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था. उन्हें ये अधिकार दिलाने के मकसद से 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया था. पहला राष्ट्रीय महिला दिवस 28 फरवरी को मनाया गया.इस दिन पुरे विश्व में महिला के लिए उनके सम्मान में अनेको कार्क्रमों का आयोजन किया जाता है.

ब्रज महोत्सव Braj mahotsav

       ब्रज महोत्सव विश्व प्रसिद्ध है. हर साल होली से पहले होने वाले इस रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत इस साल 16-17 फरवरी को होगी। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान रंग, गीत और नृत्य से जुड़ा अनेकों कार्यक्रम होंगे. यह रंग का त्योहार है. रासलीला नृत्य इस उत्सव का प्रतिष्ठित उत्सव है. यह महोत्सव भगवान कृष्ण और राधा के  रास लीलाओं पर आधारित है.

होली Holi

होली 2019 में 20  मार्च को है. होली शब्द होलिका से आया है. इसका संबंध दैत्यराज हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद की कहानी से है.सत्य ने असत्य पर इस दिन विजय प्राप्त की थी.तब से लेकर आज तक होलिका-दहन की स्मृति में होली का पर्व मनाया जाता है.रंगो के इस त्यौहार के साथ ही ऋतू परिवर्तन भी हो जाता हैं. दो दिन के इस रंग बिरंगे पर्व की शुरुआत पहले दिन होलिका दहन से होती है.भारत के हर राज्य में होली का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है.

होली ऐसा पर्व है जिसे सभी धर्मो के लोग साथ मिलकर मनाते  है. एक दूजे के रंग लगाते है और गले मिल सारे गिले शिकवे दूर करते है.बरसाने और बृज की होली,जयपुर के गोविंद देव जी के दरबार में पांच दिवसीय होली महोत्सव,पंजाब,हरियाणा, बंगाल,बिहार से लेकर नेपाल तक लोग होली त्यौहार मस्ती के साथ मनाते हैं.

      होली खेलने के लिए विदेशी सैलानी भी भारी संख्या  में भारत आते हैं. पिछले कुछ सालों में होली का प्रचलन इतना अधिक बढ़ गया है की कई देशो में होली का त्यौहार मनाया जाने लगा है.

धुलंडी Dhulandi Utsav

   21 मार्च को धुलंडी महोत्सव (रंगों का त्योहार) होलिका दहन के बाद मनाया जाएगा.ये वसंत की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन, युवा और बूढ़े समान रूप से रंग और पानी के साथ खेलते हैं. लोग जी भर कर एक दूजे के साथ अबीर गुलाल की होली खेलते हैं. चारों ओर माहौल खुश-नुमा और रंगीन होता है.

        इतिहासकारो के अनुसार धुलंडी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध किया था जिसकी खुशी में गाँव वालो ने बृंदावन में होली का त्यौहार मनाया था. भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास लीला रचाई थी और अगले  दिन रंग खेलने का उत्सव मनाया. तब से रंग खेलने का प्रचलन है. जिसकी शुरूआत वृन्दावन से हुयी थी और आज भी ब्रज की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है.

शीतला अष्टमी Shitla Asthmi

शीतला अष्टमी 28 मार्च 2019 को है.हिंदी पंचाग के अनुसार ये पर्व चैत्र माह की अष्टमी को मनाई जाती है. शीतला अष्टमी के दिन को बासौड़ा भी कहा जाता हैं.यह पर्व स्वछता का प्रतिक होता है. इस दिन ठंडा खाना खाया जाता है. इस दिन लोग शीतला माता का व्रत भी करते है. भारत के लगभग हर गांव और शहर में होली के सातवें या आठवें दिन आने वाले सोमवार या गुरुवार के दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता  है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करें,शीतला माता की पूजा में हर तरह के स्वादिष्ट व्यंजन जो एक दिन पहले बनाये हुये हो,सिर्फ उन्ही का भोग लगाते है.

       हमारे देश में यह व्रत साल में दो बार आता है. हिंदी पंचांग के अनुसार पहला चैत्र माह की अष्टमी को और दूसरा बैसाख महीने के बेदी पक्ष के किसी भी सोमवार या गुरुवार को. चैत्र माह में इसे बासौड़ा और बैसाख में इसे बूढ़ा बासौड़ा के नाम से जाना जाता  है.जो लोग चैत्र माह में ये व्रत और पूजा नहीं कर पाते है वे बैसाख महीने के बेदी पक्ष को पूजा कर के शीलता माता को प्रसन करते है.

यह भी पढ़ें-

0 Comments

Add Yours →

Leave a Reply