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World War III-तीसरा विश्व युद्ध: Will it Happen?

तीसरा विश्व युद्ध world-war-3-hindi

तीसरा विश्व युद्ध: कब, कहां और कारण

तीसरा विश्व युद्ध World War III को लेकर सोलहवीं सदी में फ्रांस में जन्मे नास्त्रेदमस Nostradamus ने जो भविष्यवाणियां prophecy of World War III की थी, उनमें सबसे महत्वपूर्ण है तीसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी. यह भविष्यवाणी सच होती है तो यह नास्त्रेदमस की सभी भविष्यवाणियों में से सबसे भयंकर साबित होगी.

संयुक्त राज्य अमेरिका Unites States of America (USA) और उत्तरी कोरिया (North Korea) के बीच बढ़ रही तकरार फिलहाल तीसरे विश्वयुद्ध Third World War का सबसे सम्भावित कारण माना जा रहा है. मगर इसके साथ ही उस भविष्यवाणी पर भी गौर करना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Secretaries General of United Nations रहे बुतरस घाली Boutros Boutros-Ghali ने तीन दशक पहले कर दी थी. 

घाली ने कहा था कि अगर ​कभी तीसरा विश्व युद्ध लड़ा गया तो वो पानी के लिए लड़ा जाएगा. विश्व बैंक World Bank के उपाध्यक्ष रहे इस्माइल सेराग्लाइडिन ने भी कहा था कि अगली सदी की लड़ाई पानी के लिए लड़ी जाएगी. पानी ही तीसरे विश्व युद्ध का कारण बनेगा, इस बात की आशंका शायद अभी भी उतनी ही है और इसीलिए पोप फ्रांसिस ने भी इस ओर इशारा किया है.

वेटिकन Vatican में 23—24 फरवरी 2017 को दी ह्यूमन राइट टू वाटर The Human Right to Water विषय पर आयोजित सेमिनार में पोप फ्रांसिस Pope Fancis ने दुनियाभर के 90 विशेषज्ञों को सम्बो​धित करते हुए कहा था कि हम पानी के लिए एक बड़े युद्ध की ओर अग्रसर हो रहे हैं.

“All people have a right to safe drinking water.”

—Pope Francis

तीसरे विश्व युद्ध की आहट Possibility of Third World War

तो क्या तीसरा महा युद्ध होने की आशंकाएं वाकई बरकरार हैं? यदि आशंकाएं हैं तो क्या पानी ही इसका सबसे बड़ा कारण होगा? आखिर पानी से जुड़े ऐसे कौनसे विवाद और मुद्दे हैं जो अमेरिका और उत्तर कोरिया की तनातनी की तरह नजर तो नहीं आ रहे लेकिन विश्व शांति World Peace के लिए खतरा बन सकते हैं और तीसरे महा युद्ध को आमंत्रित ​कर सकते हैं. क्या दुनिया के पांच प्रमुख सीमा विवाद विश्व को युद्ध की ओर धकेल सकते हैं? या फिर दुनिया के प्रमुख जल विवाद तीसरे विश्व युद्ध के कारण पैदा करेंगे ?

भारत—चीन से जुड़ा ब्रह्मपुत्र नदी से उपजा कोई विवाद, भारत—पाकिस्तान से जुड़ा सिंधु नदी का विवाद, नील नदी Blue Nile पर इथोपिया Ethiopia द्वारा बांध बनाने की घोषणा या टिगरिस नदी Tigris River पर तुर्की सरकार की बांध प्रोजेक्ट पूरा करने की उत्सुकता जैसे कारण विश्व युद्ध के लिए छोटे कारण प्रतीत होते हैं. फिर भी किसी भी विवाद पर बड़े राष्ट्रों का अपने हितों के अनुसार ध्रुवीकरण हो सकता है.

तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं Threats of World War III

रूस ने जब 18 मार्च 2014 को क्रीमिया Crimea पर कब्जा कर लिया था, तब भी विश्व युद्ध की इतनी आशंका नहीं बनी थी. इसकी तुलना में वर्ष 2017 में अप्रैल माह से लेकर नवम्बर माह तक अमेरिका और उत्तर कोरिया की लगभग 20 गतिविधियां ऐसी हुई जो युद्ध की चिंगारी को भड़का सकती थी. एक बार तो लगने लगा कि अगले महायुद्ध की उल्टी गिनती (Countdown of World War) शुरू हो गई है. किम जोंग—उन Kim Jong-un 28 दिसम्बर 2011 को उत्तर कोरिया का उत्तराधिकारी शासक बना. तभी से किम की आक्रात्मका और अमेरिका की नॉन—टॉलरेंस आधारित नीति के कारण विश्व शांति को खतरा महसूस होने लगा है और तीसरे विश्व युद्ध की सम्भावना Indication of 3rd World War बनने लगी है.

 

उत्तर कोरिया के असुरक्षित और गैर—जिम्मेदार हाथों में परमाणु हथियार Nuclear Weapons होने के अलावा भी दुनियाभर में ऐसे कई समीकरण हैं, जिनके बिगड़ने से पूरी दुनिया एक और विश्व युद्ध की ओर धकेली जा सकती है.

सीमाओं का विवाद (Border Disputes):— पहले विश्व युद्ध के कारणों में एक कारण यह भी था कि आॅस्ट्रिया Austria सर्बिया Serbia को हथियाना चाहता था. इसी प्रकार कई देशों के सीमाओं के विवाद तीसरे विश्व युद्ध के भी कारण बन सकते हैं. आज इजरायल Israel फिलिस्तीन Palestine पर कब्जा चाहता है, संयुक्त राज्य अमेरिका USA नेटिव अमेरिकी Native American प्रभाव वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण चाहता, भारत कश्मीर विवाद को सुलझाना चाहता है और चीन की निगाहें समुद्र में द्वीपों पर टिकी हुई हैं. इनमें से कोई भी कारण युद्ध की आग को चिंगारी दिखा सकता है.

 

सीरिया का मुद्दा (Issue of Syria):— सीरिया Seriya में हाल ही रूस की जीत से सीरिया के बशर अल—असद Bashar al-Assad शासन के लिए मुश्किल खड़ी हुई है और वहां गृह—युद्ध Civil War के एक नए चरण में जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी ईरान Iran में अपनी सेनाओं और Islamic State आईएसआईएस ISIS के खिलाफ लड़ाई को ध्यान में रखते हुए अलेप्पो Aleppo की रक्षा में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया. इसके बावजूद ऐसे कोई मजबूत कारण नजर नहीं आते कि ट्रम्प Donald Trump टकराव की किसी भी स्थिति को अपने पक्ष में भुनाना नहीं चाहेंगे.

सेना पर बढ़ता बजट (Increasing Military Expenditures) :— स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार विश्व के देशों का रक्षा बजट बढ़ता जा रहा है. दुनिया के सभी प्रमुख देश हथियारों और रक्षा सम्बंधी क्षेत्रों में अपने बजट का ​हिस्सा बढ़ाते जा रहे हैं.

मिलिट्री पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देश

Top 10 Countries for Military Expenditures

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सिपरी की वर्ल्ड मिलिट्री एक्सपेंडिचर रिपोर्ट World Military Expenditure Report के अनुसार दुनियाभर में 2016 में हथियारों पर 1.686 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए गए. रूस ने अपने वार्षिक बजट में जहां 5.9 प्रतिशत का इजाफा किया है वहीं चीन ने 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. रक्षा और मिलिट्री बजट आवंटन के मामले में अमेरिका तो पहले से ही टॉप पर है जिसने पिछले वर्ष 611 बिलियन डॉलर सेना पर खर्च किए. यह राशि दुनिया के ​कुल मिलिट्री खर्चे की 36 प्रतिशत है और दूसरे स्थान पर रहे चीन के खर्च से तीन गुना. वर्ष 2016 के आंकड़ों के अनुसार सेना पर खर्च करने वाले टॉप 15 देशों में भारत का स्थान अमेरिका, चीन रूस और सउदी अरब के बाद पांचवा है जिसने 55.9 बिलियन डॉलर की राशि सेना पर खर्च की है.

कौन जीतेगा तीसरा विश्व युद्ध

Who will win the World War III

संयुक्त राज्य अमेरिका के एक थिंक टैंक Think Tank संस्थान रैंड कॉर्पोरेशन RAND Corporation की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले महायुद्ध में परम्परागत क्रूज मिसाइलों के बजाय हाइपरसोनिक मिसाइल Hypersonic Missile निर्णायक भूमिका निभाएंगी. रूस, चीन और अमेरिका तीनों ही देश ऐसी मिसाइलें विकसित करने में जुटे हैं जो 25,000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से अपना लक्ष्य भेद सकती हैं. दुर्भाग्यवश यदि इस दुनिया को तीसरा विश्व युद्ध झेलना पड़ा तो यह कहना मुश्किल है कि जीत किसकी होगी. तीसरे विश्व युद्ध में जीत का पाला नहीं होगा, केवल तबाही का पैमाना होगा. विश्व के देशों का ध्रुवीकरण किसी भी प्रकार हो, विनाशक परमाणु हथियार दोनों ही तरफ होंगे. तीसरे विश्व युद्ध से होने वाली तबाही इतनी भयंकर भी हो सकती है कि अल्बर्ट आइंस्टाइन कही यह बात सच साबित हो सकती है—

“मुझे नहीं पता कि तीसरा विश्व युद्ध किन हथियारों से लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्व युद्ध लकड़ियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा.”

—अल्बर्ट आइंस्टीन

असम्भव है तीसरा विश्व युद्ध!

World War is not to Happen!

इतनी सारी आशंकाओं के बाद दुनियाभर में एक और विचार प्रचलित है कि अब कोई महायुद्ध नहीं होगा. विश्व युद्ध I और विश्व युद्ध II के परिणामों Results of World War I and World War II पर नजर डालें तो केंद्रीय और ध्रुवीय दोनों ही शक्तियों का मानना था कि उनके पास युद्ध जीतने के बेहतर अवसर थे. दोनों की शक्तियों का मानना था कि उनके विरोधियों के सामने उनकी सैन्य क्षमता में कोई ज्यादा अंतर नहीं था. हम सभी जानते हैं कि अब यह परिस्थितियां नहीं हैं.

तीसरा विश्व युद्ध Third Great War होता है तो कमोबेश अमेरिका का सभी महासागरीय क्षेत्रों पर नियंत्रण रहेगा. दुनिया के सभी महत्वपूर्ण तटीय शहर अपने—अपने देशों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और लगभग सभी शहर अमेरिका के हमले की जद में आते हैं. कोई भी देश अपनी—आप को आर्थिक रूप से गर्त में नहीं डालना चाहेगा. इस बात पर शंका है कि दुनिया के प्रमुख देश अपने आप को अमेरिका के विरुद्ध एकजुट करने की गलती करेंगे. दुनिया की आधी ताकत अमेरिका के साथ पहले से ही स्पष्ट नजर आती है परन्तु यह कभी स्पष्ट नहीं हुआ कि क्या शेष देश वास्तव में एंटी—अमेरिका अलायंस बना सकेंगे.

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