What is Holi, and how do people celebrate in hindi – होली का त्योहार

 

होली की कहानी

हिंदी पंचाग के अनुसार होली का पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. होली 2019 में 20 मार्च और धूलण्डी 21 मार्च को है, इस दिन चहुं ओर खुशी का माहौल होता है. ये महीना ही शायद ऐसा है कि हर कोई मस्ती के मूड में रहता है.
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर बंगाल तक भारत के हर प्रदेश में होली का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है.
रंगों के इस त्यौहार के साथ ही ऋतु परिवर्तन भी हो जाता है. होली के दिन से सर्द ऋतु का अंत हो ग्रीष्म ऋतु शुरु हो जाती है. दो दिन के इस रंग बिरंगे पर्व की शुरुआत पहले दिन होलिका दहन से होती है. होलिका का दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को रात में या शाम के समय होता है. अगले दिन सुबह प्रतिपदा होती है और चैत्र का महीना आरम्भ हो जाता हैं. इस दिन लोग जी भर कर एक दूजे के साथ अबीर गुलाल की होली खेलते हैं. चारों ओर माहौल खुशनुमा और रंगीन होता है.
होली शब्द होलिका से आया है. इसका संबंध दैत्यराज हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद की कहानी से है. ऐसा मानना है कि हिरण्यकश्यप अपने पिछले जन्म में भगवान विष्णु के दरबार में था लेकिन एक श्राप के कारण उसे धरती पर राक्षस के रूप में जन्म लेना पड़ा था. हिरण्यकश्यप का बेटा प्रहलाद सदैव हिरण्यकश्यप के काम का विरोध करता था इसलिए हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मरवाने के लिए अपनी बहन होलिका को बुलाया. होलिका के साथ प्रहलाद आग में बैठ गया. परंतु विष्णुभक्त प्रहलाद का बाल भी बाँका न हुआ. भक्त की विजय हुई और राक्षस की पराजय. उस दिन सत्य ने असत्य पर विजय घोषित कर दी. तब से लेकर आज तक होलिका दहन की स्मृति में होली का पर्व मनाया जाता  है.
होली भारत का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसे सभी धर्मों के लोग साथ मिलकर मनाते  हैं. एक दूजे के रंग लगाते हैं और गले मिल सारे गिले शिकवे दूर करते हैं. भारत के कई राज्यों में होली के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं. खास कर बरसाने और ब्रज की होली. पंजाब, हरियाणा, बंगाल, बिहार से लेकर नेपाल तक लोग होली का त्योहार मस्ती के साथ मनाते  हैं.
होली खेलने के लिए विदेशी सैलानी भी भारी मात्रा में भारत आते हैं. पिछले कुछ सालों में होली का प्रचलन इतना अधिक बढ़ गया है कि कई देशो में होली का त्योहार मनाया जाने लगा है.

होलिका दहन का महत्व

 
होली के दिन गली के कोने पर या चौराहों के मध्य लोग प्रहलाद रूपी एक लकड़ी गाड़ते हैं जिसे होली का डांडा भी कहा जाता है. फिर इसके चारो और लकड़ियां, झाड़-झंखाड़ लगाते हैं. फिर मुहूर्त के समय अनुसार महिलायें इसकी पूजा-अर्चना करती हैं और फिर उसमें आग लगा देते हैं.
आग में से प्रहलाद रूपी उस लकड़ी को निकाल लेते हैं. आग जलाने की यह प्रथा होलिका-दहन की याद दिलाती है और फिर सिलसिला शुरु होता है होली के धमाल का.  महिलाएं और पुरुष दोनों ही समूह में फाग (गीत) गाते हैं. और ये दौर अगले दिन सुबह धूलण्डी को परवान चढ़ता है. लोग एक-दूसरे के चेहरे पर रंग और गुलाल लगाते  हैं. होली की बधाइयाँ देते हैं और होली  गीतों पर  नृत्य करते हैं. हिन्दी फिल्मों के कई होली गीत भी बहुत लोकप्रिय हैं जो लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं.
 

धूलंडी का महत्व

 
धूलंडी महोत्सव (रंगों का त्योहार) पूरे दिन भारत में होलिका दहन के बाद मनाया जाता है और वसंत की शुरुआत का प्रतीक है. इस दिन, युवा और बूढ़े समान रूप से रंग और पानी के साथ खेलते हैं.
इतिहासकारों के अनुसार धूलंडी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध किया था, जिसकी  खुशी में गाँव वालों ने वृंदावन में होली का त्योहार मनाया था. भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास लीला रचाई थी और अगले  दिन रंग खेलने का उत्सव मनाया. तब से रंग खेलने का प्रचलन है जिसकी शुरूआत वृन्दावन से हुई थी और इसीलिये आज  भी ब्रज की होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है.

Where is the best place to celebrate Holi in India?

ब्रज  उत्सव

राजस्थान में ब्रज उत्सव हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष में दो दिनों के लिए आयोजित किया जाता है, होली से पहले यह त्योहार शुरु हो जाता है. यह त्योहार राधा और कृष्ण के निर्बाध प्रेम का भी प्रतिरूप कराता है. बृज  होली में  मुख्यत: राधा कृष्ण की रासलीला पर आधारित  नृत्य होता है. राजस्थान के भरतपुर जिले में ये त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है.

लठमार होली

ब्रज के बरसाना गाँव में एक अलग होली खेली जाती है, इसे  लठमार होली कहते हैं. ब्रज की होली ख़ास होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है .यहाँ की होली में नंदगाँव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं क्योंकि कृष्ण नंदगांव के थे और राधा बरसाने की थीं. नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उन पर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं. पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है.

Best Places to Celebrate Holi in India

जयपुर के गोविन्द देव जी में होली की मस्ती

 
जयपुर के अराध्य देव गोविन्द देव जी मंदिर में होली के अवसर पर  विशेष आयोजन होता है. मंदिर प्रांगण में होली के एक सप्ताह पूर्व ही कार्यक्रम  शुरु हो जाते है सही मायने में गोविंद के दरबार की होली न केवल देखने लाइक बल्कि भक्ति रस का वो समुद्र है. जहां जात-पात से कही ऊपर उठ कर कलाकार गोविंद के चरणों में अपनी हाजरी लगाते है. बरसों से परवीन मिर्जा, रूप सिंह शेखावत और गुलाबो जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध कलाकार अपनी कला से ठाकुर जी को रिझाते हैं. मंदिर में होली के दिन भव्य रंग उत्सव मनाया जाता है.जहां भगवान और भगत दोनों ही रंगों में रंग होते है और भगत गाते है ‘हाथी, घोड़ा, पालकी, जय कन्हैया लाल की’.

होली के फाग

 
होली का त्योहार मानाने के लिये लोग इतने उत्सुक होते हैं कि होली के पहले से ही फाग उत्सव शुरु कर देते  हैं. फाग में चंग और स्थानीय लोक वाद्य यंत्रों के साथ समूह में पारंपरिक गीत गाये जाते हैं. विशेषतः  राजस्थान और उतरप्रदेश के मथुरा के साथ ही बरसाने में गाये जाने  वाल लोक गीत (फाग) सुनने में बड़े ही मनमोहक होते हैं. 
इसके साथ ही राजस्थान के ब्यावर में होली के अगले दिन निकलने वाली बादशाह की सवारी और कोड़ा मार होली पुष्कर की कपड़ाफाड़ होली, शेखावाटी में मनाया जाने वाला गींदड़ उत्सव और फाग, उतर प्रदेश के मथुरा में सात जगह सात दिन तक चलने वाला होली उत्सव,रोहतक ,पंजाब,ओडिशा का ढोला जत्रा, बंगाल का बसंतो उत्सव के साथ ही देश का  ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां होली का धमाल ना  हो.
 
भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, कनाडा और नेपाल की होली भी काफी खास होती है.

होलिका की कहानी What is the story of Holi festival?

एक समय अत्याचारी राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर लिया कि संसार का कोई भी जीव, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे नहीं  मार सके. यहां तक कि कोई शस्त्र  भी उसे न मार पाए.
ऐसा वरदान पाकर वह अत्यंत निरंकुश बन बैठा. हिरण्यकश्यप के यहां प्रहलाद जैसा परमात्मा में विश्वास करने वाला भक्त पुत्र पैदा हुआ. प्रहलाद  भगवान विष्णु का परम भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की पूर्ण कृपा थी.
हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे. प्रहलाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया. हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के अनेक  उपाय किए लेकिन वह  भगवान विष्णु की  प्रभु-कृपा से बचता रहा.
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई.

 

Who killed holika?  होलिका बालक प्रहलाद को गोद में उठा जलाकर मारने के उद्देश्य से आग में बैठ गयी.  प्रभु-कृपा से होलिका जल कर वहीं भस्म हो गई और प्रहलाद का बाल भी बाँका न हुआ  इस तरह प्रहलाद को मारने के प्रयास में  होलिका की मृत्यु हो गई तभी से होली  का त्योहार मनाया जाने लगा.

How was Hiranyakashipu killed? कुछ समय बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में खंभे से निकले  और दरवाजे की चौखट पर बैठकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप को मार डाला.

होली के दिन के पकवान What do you eat on Holi?

होली के दिन पकवान बनाने का रिवाज है और इस दिन घरों में गुंझिया, नमकीन, मालपुए और पकौड़े विशेष रूप से बनाए जाते हैं. कई लोग इस दिन घरों में अपने रिश्तेदारों को शाम को भोजन पर आमंत्रित भी करते हैं. शाम के भोजन पर चावल, कड़ी और दही बड़े प्रमुखता से बनाए जाते हैं. होली में ठण्डाई पीने और पिलाने का प्रचलन बहुत प्रसिद्ध है और भांग की ठण्डाई का भी उपयोग किया जाता है. भांग को पीसकर ठण्डाई के शरबत में मिलाकर उपयोग में लाया जाता है.

इको फ्रेंडली होली अपनाएं How we can make Holi festival Eco friendly?

होली में रंग और पानी का उपयोग किया जाता है. पुराने समय में होली खेलने के लिए प्रयोग किये जाने वाले रंग पूरी तरह प्राकृतिक होते थे जो त्वचा के लिए फायदेमंद होते थे. इसी तरह गुलाल में भी प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल किया जाता था लेकिन समय के साथ बाजार में रासायनिक रंगों की बहुतायत हो गई जो त्वचा के बहुत खतरनाक है. हमें जहां तक संभव हो सके होली खेलने के लिए इको फ्रेंडली कलर्स का उपयोग करना चाहिए जो बाजार में आसानी से उपलब्ध है. आप चाहे तो रंग घर में भी बना सकते हैं. पीला गुलाल बनाने के लिए अरारोट के आटे में हल्दी मिलाई जा सकती है. लाल गुलाल के लिए टेसू के फूल के रस को अरारोट में मिलाकर उपयोग में लिया जा सकता है. साथ ही पानी का प्रयोग कम करना चाहिए क्योंकि पानी व्य​र्थ करने से हम आखिर में इस सीमित संसाधन का गलत दोहन ही करते हैं. इसलिए होली को ज्यादा से ज्यादा इको फ्रेंडली बनाइए और रंगों के उत्सव होली का आनंद उठाइए.

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