All About Goga Navmi In Hindi- गोगा नवमी

गोगा नवमी की सम्पूर्ण जानकारी 

हिंदी महीनों के कैलेंडर की तिथि के हिसाब से भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की नवमी के दिन गोगा (गुग्गा) नवमी  मनाई जाती है. इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार इस साल Goga Navmi 2019 – 25 August, 2019 के दिन गोगा नवमी का त्यौहार मनाया जाएगा. गोगा नवमी के दिन गोगाजी माहराज व नागों की पूजा करते हैं.

गोगा नवमी की पूजा  – Goga Navami Pujan

ऐसी पौराणिक मान्यता है कि गोगा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है. गोगा जी को  सांपों का देवता भी माना जाता है. गोगा जी  पूजा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन से शुरू होती है और गोगा जी का  यह पूजा-पाठ नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलता  है इसलिए इसे गोगा नवमी  भी कहा जाता है.

कैसे करे गोगा नवमी की पूजा – How to worship of Goga Ji

भादवा बदी नवमी को सुबह जल्दी उठ नहा धोकर खाना बना लें. खीर, चूरमा, गुलगुले आदि बनाकर जब मिट्टी की मूर्तियां लेकर महिलाएं आती है तो इनकी पूजा होती है.

रोली, चावल से टीका कर बनी हुई रसोई का भोग लगाएं. गोगाजी के घोड़े के आगे दाल रखी जाती है और रक्षाबंधन की राखी खोल कर इन्हें चढ़ाई जाती है. कहा जाता है कि रक्षाबंधन के दिन  बहनें अपने भाइयों को जो रक्षासूत्र बांधती हैं वह गोगा नवमी के दिन खोल कर गोगा जी महाराज को चढ़ा दिए जाते हैं.

कई जगह तो  गोगा जी की घोड़े पर चढ़ी हुई वीर मूर्ति होती है और कई  जगह गोगाजी की मिट्टी की मूर्ति बनाई जाती है. आज भी गांवों में पूजा करने और उनका चढ़ावा लाने का काम कुम्हार  समुदाय के लोग करते हैं.  जगह-जगह इनकी पूजा के तरीके में अंतर तो जरूर है  पर  विश्व भर में जहां भी राजस्थानी रहते हैं, वहां सब जगह इनकी पूजा होती है.

राजस्थान के कई शहरों में गोगा जी के  मेले शाम  के समय लगते हैं. हनुमानगढ़ जिले का गोगामेड़ी नामक स्थान गोगा जी के नाम से विश्व भर में प्रसिद्ध है, जहां स्थित गोगामेड़ी मंदिर में लोग उनकी पूजा अर्चना करने जाते हैं. राजस्थान के अलावा यह त्योहार पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों
में मनाया जाता है.

दिवार पर गोगा इस तरह बनाएं 

पांच पीरों में एक Regarded in Five Pir गोगा नवमी के नाम से प्रसिद्ध ये  त्यौहार  गोगा जी के  नाम से भी जाना जाता  है. कहते हैं कि  गोगाजी की गिनती पांच पीरों में भी है.  

ऐसी धारणा है कि गोगा जी से मन्नत मांगने वालों के काम सिद्ध होते हैं. सांपों से रक्षा के लिए भी गोगा जी की पूजा की जाती है. इनकी कहानियां भी बहुत प्रचलित हैं.  इसके आलावा गोगा जी को नीले  घोड़े वाला और त्रिशूल वाले पीर के नाम से भी जानते  हैं.  

गोगा जी महाराज के लोक गीत और भजन – Folk songs and bhajan of Goga Ji  

गोगा जी पर कई गायक कलाकारों ने खूब  सारे गीत और भजन भी बनाये हैं जो कि अक्सर रात्रि जागरण और मेले  में सुनने को मिल जाते  हैं. कई कलाकारों ने गोगा चालीसा और कई सारे भजन  माला की ऑडियो-वीडिओ CD  / DVD भी बनाई हुई हैं जो कि आसानी से बाजार में उपलब्ध हैं.  ये गाने और भजन काफी मशहूर हैं-


भादवे में गोगा नवमी आगी रे, भगता में

मस्ती सी छागी रे.

गोगा पीर दिल के अंदर थारी
मैडी पे
में आया.

मुझ दुखिया को तू अपना
ले ओ नीला घोड़े
आळे.

मेरे दिल में बस गया है
गोगाजी घोड़ेवाला, वो बाछला माँ
का लाला वो है नीला
घोड़े वाला, दुखियो
का सहारा गोगा पीर.

गोगा जी महाराज की कथा Story of Goga Ji Maharaj

गोगा नवमी के विषय में बहुत ही प्रचलित कहानी है कि गोगा मारू देश के राजा थे और उनकी मां  बाछला, गुरु गोरखनाथ जी की परम भक्तों में से एक थीं. कथा के अनुसार एक दिन बाबा गोरखनाथ अपने शिष्यों समेत बाछला के राज्य में गए. जब रानी को इस बात का पता चला तो वह बहुत प्रसन्न हुईं.

बाबा गोरखनाथ अपने  एक शिष्य  को नगर में जाकर परिक्रमा  लगाने का आदेश देते हैं. गुरु का आदेश पाकर शिष्य नगर में भ्रमण के लिए निकल पड़ता है और भिक्षा मांगते हुए वह राजमहल में जा पहुंचा. रानी ने उसे बहुत सारा धन भिक्षा के रूप में दिया लेकिन गोरखनाथ जी के शिष्य ने वह लेने से मना कर दिया और थोड़ा सा अनाज मांगा.

रानी अहंकारवश कहती है कि राजमहल के गोदामों में तो आनाज का भंडार है तुम इस अनाज को कैसे ले जाना चाहोगे तो वह अपना भिक्षापात्र आगे बढ़ा देता है. सारा आनाज उसके भिक्षा पात्र में समा गया और राज्य का अनाज गोदाम खाली हो गया फिर भी  योगी का पात्र नहीं  भरा.

तब रानी गोरखनाथ के शिष्य की शक्ति के सामने नतमस्तक हो गईं और उनसे क्षमा याचना की गुहार लगाने लगीं और कोई संतान न होने का दुख बताती हैं. भिक्षक ने रानी को अपने गुरु गोरखनाथ से मिलने की सलाह दी और कहा कि उनसे ही आप को पुत्र प्राप्ति का वरदान मिल  सकता है. यह बात सुनकर रानी अगली सुबह ही जब गुरु गोरखनाथ के आश्रम जाने को तैयार होने लगी.

तभी उसकी बहन काछला वहां पहुंचकर सारी बात जान लेती है और गुरु गोरखनाथ के पास पहले पहुंचकर उससे आर्शीवाद के रूप में दो फल ग्रहण करती है. उसके बाद रानी जब गुरु गोरखनाथ के पास पहुंचती है तो गोरखनाथ जी जो कि पहले से ही सारी बात जानते थे.

उन्होंने रानी को भी प्रसाद के रूप में फल दे दिए और साथ ही ये आशीर्वाद दिया कि उसे पुत्र की प्राप्ति होगी जो कि  वीर पुरुष होगा और  नागों को वश में करने वाला तथा सिद्धों का शिरोमणि होगा जिसकी गाथाये लोग सदियों तक गायेगे. फिर कुछ समय बाद रानी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और रानी की कोख से जन्मे बालक का नाम गोगा (गुग्गा)रखा गया.

गोगाजी का ब्यावला

बड़े होने पर जब गोगा जी का विवाह बंगाल के राजा मालप की बेटी से होना तय होता है. परंतु राजा ने अपनी बेटी की शादी गोगा से करवाने से मना कर दिया. इस बात से दुखी गोगा जी गुरु गोरखनाथ जी के पास जाते हैं और उन्हें सारी बात  बताते हैं.

बाबा गोरखनाथ ने गुग्गा जी को दुखी देख उनकी सहायता के लिए वासुकी नाग से राजा की कन्या को विषप्रहार करवाया. कहते हैं राजा के वैद्य उस विष के प्रभाव को कम नहीं कर पाए. तभी वेश बदले वासुकी नाग ने राजा से कहा कि यदि वह गुग्गा मंत्र का जाप करे तो विष का प्रभाव समाप्त हो जाएगा. 

राजा गुगमल मंत्र का प्रयोग विष उतारने के लिए करने लगे और देखते ही देखते राजा की बेटी सुरियल विष के प्रभाव से मुक्त हो गई और राजा अपने कथन अनुसार अपनी पुत्री का विवाह गुगमल से करवाते हैं.

गोगा जी के जयकारे 

  • गोगा जी महाराज की जय
  • नीले  घोड़े वाले की जय
  • बोलिया गोगा पीर की जय 

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